इस साइट के हर प्रोडक्ट पेज पर किसी एक लिस्टिंग पर "Best Pick" का बैज लगा होता है। यह मान लेना आसान है कि इस बैज का मतलब बस "सबसे सस्ता" है, लेकिन ऐसा नहीं है। और यह समझाना ज़रूरी है कि क्यों, क्योंकि सिर्फ़ सबसे कम क़ीमत के हिसाब से छाँटने पर आपकी उम्मीद से कहीं ज़्यादा बार सचमुच ख़राब सुझाव निकलते हैं।
सिर्फ़ क़ीमत से छाँटने में दिक़्क़त क्या है
मान लीजिए एक ही हेडफ़ोन की दो लिस्टिंग हैं। एक ₹1,499 की है, 3,200 रिव्यू के साथ 4.6 स्टार रेटिंग वाली। दूसरी ₹1,399 की है, 40 रिव्यू के साथ 2.1 स्टार रेटिंग वाली, और उसकी जानकारी में बंद पड़े यूनिट की शिकायतें भरी पड़ी हैं। सिर्फ़ सबसे कम क़ीमत वाली छँटाई दूसरी को चुनेगी। ऐसा सुझाव असल में कोई नहीं चाहता।
इसलिए Best Pick बैज के पीछे का स्कोर पाँच चीज़ों को मिलाकर बनता है:
स्टार रेटिंग (स्कोर का 40%)। क़ीमत से अलग, प्रोडक्ट अपने आप में अच्छा है या नहीं, इसका सबसे मज़बूत अकेला संकेत।
रिव्यू की संख्या (20%)। 3 रिव्यू से मिली 5.0 रेटिंग और 4,000 रिव्यू से मिली 4.6 रेटिंग एक जैसी भरोसेमंद नहीं होतीं। दूसरे आँकड़े का कुछ मतलब है। इसे लॉगरिदमिक पैमाने पर नापा जाता है, इसलिए 10 से 100 रिव्यू पर पहुँचना 900 से 1,000 पर पहुँचने से ज़्यादा मायने रखता है। हर नए रिव्यू से बढ़ने वाला भरोसा धीरे-धीरे ठहर जाता है।
क़ीमत में मुक़ाबला (25%)। इस ख़ास लिस्टिंग की क़ीमत उसी प्रोडक्ट की बाक़ी सभी ट्रैक की गई लिस्टिंग के मुक़ाबले कैसी है। यह कोई मनमाना "क्या यह सस्ता है" वाला फ़ैसला नहीं है, बल्कि असली विकल्पों से सीधी तुलना है।
उपलब्धता पर भरोसा (10%)। लिस्टिंग इस समय स्टॉक में है या नहीं, और हमने यह कितने समय पहले पक्का किया। कोई बढ़िया लिस्टिंग जो असल में स्टॉक में नहीं है, या जिसे एक हफ़्ते से जाँचा नहीं गया, उसका वज़न घटा दिया जाता है। बंद पड़े लिंक का सुझाव देने से किसी का भला नहीं होता।
प्लेटफ़ॉर्म पर भरोसा (5%)। उन प्लेटफ़ॉर्म के लिए एक छोटा, तय वज़न जिनके बायर-प्रोटेक्शन प्रोग्राम ज़्यादा मज़बूत हैं। इसे जान-बूझकर सबसे छोटा फ़ैक्टर रखा गया है। इसका काम कड़े मुक़ाबले में हल्का सा पलड़ा झुकाना है, बाक़ी सब पर हावी होना नहीं।















