आपने यह पहले भी देखा होगा: किसी प्रोडक्ट पर "₹4,999" कटा हुआ दिखता है, और "₹2,999" की नई क़ीमत के बग़ल में चमकता हुआ "-40%" का बैज। देखने में बढ़िया डील लगती है। कभी-कभी होती भी है। अक्सर नहीं होती।
ऑनलाइन रिटेल की सबसे पुरानी चाल यह है कि सेल से कुछ दिन पहले प्रोडक्ट की "असली" क़ीमत बढ़ा दी जाए, ताकि डिस्काउंट जितना है उससे बड़ा दिखे। आप आख़िर में जो क़ीमत चुकाएँगे, हो सकता है वह ठीक वही हो जिस पर प्रोडक्ट महीनों से मिल रहा है। बस उसके बग़ल में आपको एक बड़ा और ज़्यादा लुभावना प्रतिशत दिख रहा है।
इसे असल में एक मिनट से भी कम में ऐसे जाँचा जा सकता है।
1. सिर्फ़ आज की क़ीमत नहीं, प्राइस हिस्ट्री देखिए
किसी एक समय की क़ीमत से लगभग कुछ पता नहीं चलता। आपको यह जानना है: क्या यह प्रोडक्ट पहले कभी सचमुच इससे सस्ता रहा है, या आज यह अब तक की सबसे कम क़ीमत पर है?
ठीक इसी वजह से PickBestProducts के हर प्रोडक्ट पेज पर प्राइस हिस्ट्री का चार्ट दिखता है, जो रोज़ ट्रैक की गई क़ीमतों से बनता है, सिर्फ़ उससे नहीं जो लिस्टिंग अपनी "असली" क़ीमत बताती है। अगर चार्ट में क़ीमत हफ़्तों से लगभग एक ही दायरे में ऊपर-नीचे हो रही है और आज की क़ीमत उस दायरे के निचले सिरे पर है, तो डील असली है। अगर आज की क़ीमत असल में उससे ज़्यादा है जहाँ वह पिछले महीने के ज़्यादातर समय रही, तो "% off" वाला बैज बढ़ा-चढ़ाकर रखी गई क़ीमत से नाप रहा है, उससे नहीं जो आप आम तौर पर चुकाते।
2. सिर्फ़ एक लिस्टिंग के भीतर नहीं, अलग-अलग स्टोर पर तुलना कीजिए
दूसरी चाल थोड़ी बारीक है: एक प्लेटफ़ॉर्म की "डील" दूसरे प्लेटफ़ॉर्म की बिना डिस्काउंट वाली क़ीमत से भी महँगी हो सकती है। Amazon पर 30% off के बैज का ख़ास मतलब नहीं, अगर वही प्रोडक्ट Flipkart पर बिना किसी बैज के उससे कम क़ीमत पर मिल रहा है।
तुलना करने वाला टूल काम का ही इसी वजह से है। प्रतिशत वाला बैज मार्केटिंग है; असल मायने रुपयों (या डॉलर, या पाउंड) की असली रक़म के हैं। जब आप यहाँ किसी प्रोडक्ट पेज पर आते हैं, तो हम उस प्रोडक्ट की हर ट्रैक की गई लिस्टिंग को पहले ही असली क़ीमत के हिसाब से रैंक कर चुके होते हैं, इस हिसाब से नहीं कि किसका बैज सबसे ज़्यादा शोर मचा रहा है।
3. देखिए कि रेटिंग और रिव्यू की संख्या सचमुच क़ीमत का साथ देती है या नहीं
जिस प्रोडक्ट के रिव्यू बहुत कम हों, या जिसके रिव्यू शक पैदा करने की हद तक एक जैसे लगें, उस पर भारी डिस्काउंट को दोबारा देख लेना चाहिए। अकेले में यह किसी बात का सबूत नहीं है। लेकिन अगर प्राइस हिस्ट्री भी छेड़छाड़ वाली लगे, तो यह उसी तरफ़ इशारा करने वाला दूसरा संकेत है।
4. यह मत मान लीजिए कि "prime" बैज या तेज़ डिलीवरी के लेबल का मतलब सबसे अच्छी क़ीमत है
तेज़ डिलीवरी और क़ीमत दो बिल्कुल अलग चीज़ें हैं, लेकिन बहुत से ख़रीदार अनजाने में "कल पहुँच जाएगा" को "यही अच्छा विकल्प है" समझ लेते हैं। हो भी सकता है। फिर भी ऐसा मान लेने से पहले उसके बग़ल में लिखी रक़म को बाक़ी लिस्टिंग से मिलाकर देख लेना चाहिए।
छोटे में कहें तो
अगर आपको सिर्फ़ एक बात याद रखनी है: डिस्काउंट का प्रतिशत एक दावा है, प्राइस हिस्ट्री सबूत है। जब भी आप किसी "डील" की वजह से कुछ ख़रीदने वाले हों, पहले प्राइस चार्ट खोल लीजिए। इसमें दस सेकंड लगते हैं, और सचमुच पैसे बचाने और सिर्फ़ ऐसा महसूस करने के बीच का फ़र्क़ यही है।
हम जिस भी प्रोडक्ट को ट्रैक करते हैं, उसके लिए आप यह देख सकते हैं। बस उसे सर्च कीजिए और उसका प्रोडक्ट पेज खोलिए। प्राइस हिस्ट्री का चार्ट वहीं सामने है, ढूँढना नहीं पड़ता।